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बकौली आश्रम का विवरण

भारत लंबे समय से आध्यात्मिक खोजियों का प्रमुख स्थान रहा है। यहां के आश्रम अपनी विभिन्न आध्यात्मिक व यौगिक क्रियाओं के लिए विश्वभर में जाने जाते हैं। ऋषि परंपरा पर आधारित भारतीय संस्कृति में आध्यात्मिकता पूर्ण रूप से निहित है। जिसकी झलक आप भारतीय रीति रिवाजों व परम्पराओं में देख सकते हैं। बकौली आश्रम एक ऐसा ही ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है, जो भारत के दिल्ली राज्य के उत्तर पश्चिम जिले के बकौली ग्राम में स्थित है। भक्तगण यहाँ के शांत वातावरण, वृक्षों की शीतल छाया, पशुओ की सेवा, धार्मिक ग्रंथो के पठन-पाठन, गुरु जी के आशीर्वाद से लाभान्वित होने के लिए नित्य आते हैं। यह आश्रम आंतरिक भक्ति, शुद्धता और शांति प्रदान करने में अन्यतम है |

भगवान हरि शंकर एवं हमारे गुरु


भगवान श्री हरि शंकर

विष्णु सहस्रनाम में विष्णु को शम्भु, शिव, ईशान और रुद्र के नाम से बुलाया गया है, जिससे यह साबित होता है कि शिव और विष्णु एक ही है| वेदों और पुराणों भगवान हरिशंकर को श्रृष्टि का पालनहार कहा गया है. मानव जीवन से जुड़े सुख-दुख का चक्र श्री हरि‍ के हाथों में है| भगवान हरिशंकर ही जीवों की आत्मा सृष्टि के भोगकर्त्ता और शाश्वत है | समस्त चराचर जगत और देवता, पितर एवं राक्षस भगवान हरिशंकर से ही निःसृत है और ऊन्ही के वशीभूत है | पञ्च ज्ञानेन्द्रियाँ, पञ्च कर्मेन्द्रियाँ, मन, बुद्धि, सत्व, तेज, बल आदि सभी भगवान हरिशंकर के ही रूप है | उन्ही के प्रताप से स्वर्ग, सूर्य, चन्द्रमा, नक्षत्र, आकाश, दिशा, ग्रह, पृथ्वी और समुद्र अस्तित्ववान हैं | जो भी जीव विश्वनियन्ता, जगत्कर्ता, पालनकर्त्ता और हर्त्ता भगवान हरिशंकर का गुणगान करते हैं वे दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों एवं संकटों से प्रभावित नहीं होते हैं | भगवान हरिशंकर के भक्तों को क्रोध, ईर्ष्या, लोभ और अशुभ की प्राप्ति नहीं होती है और उसे आत्मसुख, शांति, लक्ष्मी, बुद्धि, स्मृति और कीर्ति की प्राप्ति होती है |

तपोमूर्ति सिद्ध संत स्वामी श्री उमाशंकरानन्द जी महाराज

ऐसे धर्म सम्राट परोपकार की साक्षात् मूर्ति लाखों भक्तों के ह्रदय भवन में निवास करने वाले परम दयालू, सहज ही कृपा करने वाले पूज्य गुरुदेव भगवान स्वामी श्री राम भारती जी महाराज ने गत 16 दिसम्बर 1998 ई. को अखंड समाधि ले ली | वे ब्रह्मलीन हो गए | उनकी समाधि स्थल पूज्य सद्गुरू स्वामी श्री उमाशंकरानन्द जी महाराज की समाधि के अतिसन्निकट स्थित है, जो श्रद्धालू भक्तों के लिए कल्पवृक्ष के समान है | समाधिस्थ होने से पूर्व पूज्य महाराज जी ने उत्तराधिकारी के रूप में अपने परम प्रिय शिष्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री ओंकारानन्द भारती (गिरी) जी महाराज को अपना उत्तरदायित्व सौंप दिया था | इनके कुशल संरक्षण में हमारी यह संस्था शनैः शनैः विकास के पथ पर अग्रसर होती जा रही है और आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि इस संस्था का भविष्य बहुत ही उज्जवल है | इनके कुशल संचालन में बड़ी विशाल गौशालाओं का निर्माण हो चुका है और कई मंदिर, यज्ञशाला निर्माणाधीन है | अब हमारी संस्था बहुमुखी विकास की ओर अग्रसर है |

समाधिस्थ तपोमूर्ति संत पूज्य सद्गुरू देव स्वामी श्री राम भारती जी महाराज

अक्षय तृतीया सन 1968 को इस विशाल संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना की | संस्कृत भाषा के प्रति अपने अनुराग को साकार रूप प्रदान कर विद्यालय भवन एवं विशाल छात्रावास का निर्माण कराया, निःशुल्क शिक्षा, भोजन व आवास की व्यवस्था के सहित इस संस्कृत महाविद्यालय का सफलतापूर्वक संचालन किया | हमारा यह संस्कृत महाविद्यालय सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध है | प्रथमा से शास्त्री पर्यन्त व्याकरण व साहित्य कक्षाओं के लिए स्थायी मान्यता प्राप्त है | संस्कृत और भारतीय सनातन संस्कृति का अन्योन्याश्रय संबंध है | अस्तु हमारी संस्था ऋषिकुल संस्कृति के आधार पर वेशभूषा, दिनचर्या एवं आचरण का अनुशरण करती है |

परमादर्श महामंडलेश्वर स्वामी श्री ओंकारानन्द भारती (गिरी) जी महाराज

आज हमलोग जिस परम पवित्र आश्रम की पतित पावनी भूमि पर उपस्थित हैं, उसको लगभग 160 वर्ष पूर्व श्रोतिय ब्रह्मनिष्ठ परमहंस अनंत श्री विभूषित स्वामी श्री उमाशंकरानन्द जी महाराज ने अपने चरणविंद से पवित्र किया था | तत्पश्चात इसी पुण्य भूमि पर 70 वर्ष पूर्व समाधिस्थ हुए थे | उन्ही महर्षि की समाधि श्री हरिशंकर मंदिर के सामने वट वृक्ष के समीप स्थित है जिसके दर्शन मात्र से श्रद्धालू भक्तों, सज्जनों को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है, श्रद्धापूर्वक इनकी परिक्रमा करने से मानव जीवन की समस्त कामनाएं पूर्ण होती हैं तथा आधि-व्याधि, भूत-प्रेत, पिशाच आदि की सभी बाधाएँ दूर हो जाती हैं | उन्ही ब्रह्मर्षि के मूर्तिमान स्वरूप शिष्य तमोमूर्ति परमहंस स्वामी श्री राम भारती जी महाराज ने विगत 80 वर्षों तक इस आश्रम का कुशलता पूर्वक संचालन किया | अपनी पीयूषमयी वाणी से ज्ञान की गंगा बहायीऔर निरंतर आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से निर्मित औषधियों के माध्यम से जनता जनार्दन की निःशुल्क परोपकार वृति से निःस्वार्थ सेवा की | लाखों नर-नारियों को असाध्य रोगों से मुक्त किया | कर्म, भक्ति और ज्ञान की त्रिवेणी में अनगिनत भक्तों को अवगाहन कराया और उनकी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया और अनेकों आश्रम, संस्थाओं और गौशाला की भव्य स्थापना की | गौशाला इस आश्रम की सर्वोपरि शोभा है |

भगवान श्री हरि शंकर

विष्णु सहस्रनाम में विष्णु को शम्भु, शिव, ईशान और रुद्र के नाम से बुलाया गया है, जिससे यह साबित होता है कि शिव और विष्णु एक ही है| वेदों और पुराणों भगवान हरिशंकर को श्रृष्टि का पालनहार कहा गया है. मानव जीवन से जुड़े सुख-दुख का चक्र श्री हरि‍ के हाथों में है| भगवान हरिशंकर ही जीवों की आत्मा सृष्टि के भोगकर्त्ता और शाश्वत है | समस्त चराचर जगत और देवता, पितर एवं राक्षस भगवान हरिशंकर से ही निःसृत है और ऊन्ही के वशीभूत है | पञ्च ज्ञानेन्द्रियाँ, पञ्च कर्मेन्द्रियाँ, मन, बुद्धि, सत्व, तेज, बल आदि सभी भगवान हरिशंकर के ही रूप है | उन्ही के प्रताप से स्वर्ग, सूर्य, चन्द्रमा, नक्षत्र, आकाश, दिशा, ग्रह, पृथ्वी और समुद्र अस्तित्ववान हैं | जो भी जीव विश्वनियन्ता, जगत्कर्ता, पालनकर्त्ता और हर्त्ता भगवान हरिशंकर का गुणगान करते हैं वे दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों एवं संकटों से प्रभावित नहीं होते हैं | भगवान हरिशंकर के भक्तों को क्रोध, ईर्ष्या, लोभ और अशुभ की प्राप्ति नहीं होती है और उसे आत्मसुख, शांति, लक्ष्मी, बुद्धि, स्मृति और कीर्ति की प्राप्ति होती है |

तपोमूर्ति सिद्ध संत स्वामी श्री उमाशंकरानन्द जी महाराज

ऐसे धर्म सम्राट परोपकार की साक्षात् मूर्ति लाखों भक्तों के ह्रदय भवन में निवास करने वाले परम दयालू, सहज ही कृपा करने वाले पूज्य गुरुदेव भगवान स्वामी श्री राम भारती जी महाराज ने गत 16 दिसम्बर 1998 ई. को अखंड समाधि ले ली | वे ब्रह्मलीन हो गए | उनकी समाधि स्थल पूज्य सद्गुरू स्वामी श्री उमाशंकरानन्द जी महाराज की समाधि के अतिसन्निकट स्थित है, जो श्रद्धालू भक्तों के लिए कल्पवृक्ष के समान है | समाधिस्थ होने से पूर्व पूज्य महाराज जी ने उत्तराधिकारी के रूप में अपने परम प्रिय शिष्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री ओंकारानन्द भारती (गिरी) जी महाराज को अपना उत्तरदायित्व सौंप दिया था | इनके कुशल संरक्षण में हमारी यह संस्था शनैः शनैः विकास के पथ पर अग्रसर होती जा रही है और आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि इस संस्था का भविष्य बहुत ही उज्जवल है | इनके कुशल संचालन में बड़ी विशाल गौशालाओं का निर्माण हो चुका है और कई मंदिर, यज्ञशाला निर्माणाधीन है | अब हमारी संस्था बहुमुखी विकास की ओर अग्रसर है |

समाधिस्थ तपोमूर्ति संत पूज्य सद्गुरू देव स्वामी श्री राम भारती जी महाराज

अक्षय तृतीया सन 1968 को इस विशाल संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना की | संस्कृत भाषा के प्रति अपने अनुराग को साकार रूप प्रदान कर विद्यालय भवन एवं विशाल छात्रावास का निर्माण कराया, निःशुल्क शिक्षा, भोजन व आवास की व्यवस्था के सहित इस संस्कृत महाविद्यालय का सफलतापूर्वक संचालन किया | हमारा यह संस्कृत महाविद्यालय सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध है | प्रथमा से शास्त्री पर्यन्त व्याकरण व साहित्य कक्षाओं के लिए स्थायी मान्यता प्राप्त है | संस्कृत और भारतीय सनातन संस्कृति का अन्योन्याश्रय संबंध है | अस्तु हमारी संस्था ऋषिकुल संस्कृति के आधार पर वेशभूषा, दिनचर्या एवं आचरण का अनुशरण करती है|

परमादर्श महामंडलेश्वर स्वामी श्री ओंकारानन्द भारती (गिरी) जी महाराज

आज हमलोग जिस परम पवित्र आश्रम की पतित पावनी भूमि पर उपस्थित हैं, उसको लगभग 160 वर्ष पूर्व श्रोतिय ब्रह्मनिष्ठ परमहंस अनंत श्री विभूषित स्वामी श्री उमाशंकरानन्द जी महाराज ने अपने चरणविंद से पवित्र किया था | तत्पश्चात इसी पुण्य भूमि पर 70 वर्ष पूर्व समाधिस्थ हुए थे | उन्ही महर्षि की समाधि श्री हरिशंकर मंदिर के सामने वट वृक्ष के समीप स्थित है जिसके दर्शन मात्र से श्रद्धालू भक्तों, सज्जनों को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है, श्रद्धापूर्वक इनकी परिक्रमा करने से मानव जीवन की समस्त कामनाएं पूर्ण होती हैं तथा आधि-व्याधि, भूत-प्रेत, पिशाच आदि की सभी बाधाएँ दूर हो जाती हैं | उन्ही ब्रह्मर्षि के मूर्तिमान स्वरूप शिष्य तमोमूर्ति परमहंस स्वामी श्री राम भारती जी महाराज ने विगत 80 वर्षों तक इस आश्रम का कुशलता पूर्वक संचालन किया | अपनी पीयूषमयी वाणी से ज्ञान की गंगा बहायीऔर निरंतर आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से निर्मित औषधियों के माध्यम से जनता जनार्दन की निःशुल्क परोपकार वृति से निःस्वार्थ सेवा की | लाखों नर-नारियों को असाध्य रोगों से मुक्त किया | कर्म, भक्ति और ज्ञान की त्रिवेणी में अनगिनत भक्तों को अवगाहन कराया और उनकी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया और अनेकों आश्रम, संस्थाओं और गौशाला की भव्य स्थापना की | गौशाला इस आश्रम की सर्वोपरि शोभा है |

चित्रशाला

यहाँ आश्रम की विभिन्न गतिविधियों- गौ सेवा, बाल शिक्षा, भंडारा और आध्यात्मिक चिंतन-मनन से जुडी तस्वीरों को देखा जा सकता है |

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आश्रम गतिविधियाँ

आश्रम की गौ सेवा, बाल शिक्षा, भंडारा और आध्यात्मिक चिंतन-मनन से अपनी विभिन्न गतिविधियों से संबंधित आयोजनों, उत्सवों आदि की सूची देखि जा सकती है |

गौशाला

आश्रम में गौ सेवा का विशेष प्रबंध है। गायों के रहने के लिए गौशाला का निर्माण करवाया गया है। जिसमे गायों के लिए उपयुक्त चारे की व्यवस्था, गर्मी से राहत के लिए पंखे, कमजोर और बीमार गायों की चिकित्सा सुविधा और जाड़े के दिनों में उन्हें ठण्ड से बचाने और आराम करने के लिए जूट के बोरे उपलब्ध कराया जाता हैं।

संस्कृत महाविद्यालय

अक्षय तृतीया सन 1968 को इस विशाल संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना की| संस्कृत भाषा के प्रति अपने अनुराग को साकार रूप प्रदान कर विद्यालय भवन एवं विशाल छात्रावास का निर्माण कराया, निःशुल्क शिक्षा, भोजन व आवास की व्यवस्था के सहित इस संस्कृत महाविद्यालय का सफलतापूर्वक संचालन किया| हमारा यह संस्कृत महाविद्यालय सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध है| प्रथमा से शास्त्री पर्यन्त व्याकरण व साहित्य कक्षाओं के लिए स्थायी मान्यता प्राप्त है| हमारी संस्था ऋषिकुल संस्कृति के आधार पर वेशभूषा, दिनचर्या एवं आचरण का अनुशरण करती है|

भंडारा

पूज्य महाराज जी की पुण्य स्मृति में श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ, कथा व भण्डारे का वर्ष में दो बार आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु भक्तगण तन-मन-धन से सहयोग प्रदान करते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं|

धार्मिक पठन पाठन

यह आश्रम धर्म और आस्था का मुख्य केंद्र है, जहां लोग मानसिक व आत्मिक शांति के लिए आते हैं। यहां पूज्य महाराज जी द्वारा ज्ञान व आत्मिक चिंतन पर अधिक जोर दिया जाता है। यहां योगप्राणायाम, तनाव मुक्त व ध्यान संबंधी कई सत्रों का आयोजन किया जाता है, जिससे की इंसान एक स्वस्थ जीवन जी सके। यह संस्था समय-समय पर सार्वजनिक कार्यों में भी हिस्सा लेती है, जिससे आम इंसान अपनी जिम्मेदारियों को समझ जागरूक बन सकें। यह योग से जुड़ी क्रियाओं व आध्यात्मिक चिंतन पर विशेष बल देता है।

घोषणाएं

आश्रम में भंडारे, धार्मिक पठन पठान, सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि आयोजनों एवं उत्सवों आदि की सूची देखी जा सकती है |

वसन्त पञ्चमी के पावन पर्व पर हमारे संस्कृत महाविद्यालय(श्री भारती ऋषि-कुल संस्कृत महाविद्यालय, श्री हरिशंकर मंदिर बकौली, दिल्ली-36)में श्री सरस्वती पूजन का उत्सव मनाया जाता है | इस कार्यक्रम में सभी छात्रगण स्वस्ति वाचन एवं वैदिक मंत्रों का उच्चारण करते हैं|

एवं वसन्त पञ्चमी के ही पावन पर्व पर तीर्थ स्थल हरिद्वार में स्थित आश्रम-माँ कात्यायनी शक्ति, सत्संग आश्रम ट्रस्ट (रजि.)भूपत वाला सप्तसरोवर मार्ग हरिद्वार में भगवती माँ कात्यायनी की प्राण प्रतिष्ठा दिवस के उपलक्ष्य में पंच दिवसीय कार्यक्रम संपन्न किया जाता है, जिसमें माँ भगवती का चंडी पाठ, हवन व विशाल भण्डारे का आयोजन किया जाता है | जिसमें हजारों संत भण्डारे का प्रसाद ग्रहण करते हैं |

श्री गंगा दशहरा के पावन पर्व पर अपने श्री हरिद्वार आश्रम में गंगा दशहरा का उत्सव मनाया जाता है, जिसमें विद्वान ब्राह्मणों द्वारा श्री दुर्गा सप्तसती का पाठ, पूजन किया जाता है | यह सप्त दिवसीय कार्यक्रम होता है, जिसमें गंगा दशहरा के पावन पर्व पर विशाल भण्डारे का आयोजन किया जाता है |

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरू पूर्णिमा कहते हैं | इस दिन गुरू पूजन का विधान है | चारों वेदों के ज्ञाता, संस्कृत का महान विद्वान और महाभारत के रचयिता श्री कृष्ण द्वैपयान व्यास जी का जन्म दिवस भी है | उन्हें आदिगुरू भी कहा जाता है और उनके सम्मान में गुरू पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है | शास्त्रों में 'गु' का अर्थ है- अंधकार या मूल अज्ञान और 'रू'का अर्थ है-निवारण करने वाला | गुरू को गुरू इसलिए कहा जाता है कि वह अज्ञान तिमिर का ज्ञानांजन-शलाका से निवारण कर देता है |

"अज्ञान तिमिरान्धस्चज्ञानांजन-शलाकया, चक्षुन्मीलितमयेन, तस्मै श्री गुरवे नमः||" सद्गुरू की कृपा से ईश्वर का साक्षात्कार भी संभव है | गुरू की कृपा के अभाव में कुछ भी संभव नहीं है | अतः गुरू पूजन के उपलक्ष्य में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ का आयोजन किया जाता है, जिसमें विद्वान ब्राह्मणों द्वारा देवी-देवताओं व श्रीमद्भागवत महापुराण का पूजन तथा पूजनीय श्री व्यास जी द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का कार्यक्रम किया जाता है | कथा विराम के पश्चात् हवन व विशाल भण्डारे का आयोजन किया जाता है| जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालू भक्त भण्डारे का प्रसाद ग्रहण करते हैं एवं पूजनीय स्वामी श्री महाराज जी द्वारा आशीर्वाद प्राप्त करते हैं|

शारदीय नवरात्रि कार्यक्रम के अंतर्गत अपने श्री हरिद्वार आश्रम में सतचंडी यज्ञ का आयोजन किया जाता है एवं दिल्ली स्थित हरिशंकर मंदिर ऋषिकुल आश्रम में इस पर्व के अंतर्गत नौ दिनों तक श्री रामचरितमानस का नवाह्न परायण पाठ संपन्न किया जाता है|

श्री सद्गुरू देव जी की पुण्यतिथि के पवन अवसर पर "श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ" का आयोजन किया जाता है| यह कार्यक्रम द्वादश दिवसीय संपन्न होता है | श्री सद्गुरू देव जी की पुण्यतिथि के दिन विशाल भण्डारे का आयोजन किया जाता है| जिसमें हजारों श्रद्धालू भण्डारे का प्रसाद ग्रहण कर अपने मानव जीवन को सफल बनाते हैं| यह कार्यक्रम पौष कृष्ण पक्ष तृतीया से प्रारंभ होकर पौष कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तक चलता है| इस कार्यक्रम का आयोजन पौष मास के कृष्ण पक्ष में किया जाता है |